बस में एक बच्चा पीछे बैठा था। उम्र कोई सात - आठ साल। चुप चाप। तभी एक लड़का जिसकी उम्र पंद्रह - सोलह के आस पास होगी, आया और उस छोटे बच्चे को घूरने लगा। फिर उन दोनों कि बहस शुरू हुई।
"अब्बे ! ये मेरी सीट है। " लड़के ने धौंस जमाते हुए कहा।
"तो ?" बच्चे ने आत्मविश्वास के साथ कहा।
"तो , उठ जा। मैं यहाँ बैठूंगा। "
"कही और बैठ जाइये , मैं यहाँ से उठने वाला नहीं हूँ । "
"चुप चाप उठ जा वर्ना , मैं तेरा बैग उठा के फेक दूंगा । समझा !"
"बैग को हाथ लगाया तो मातारानी आपको पाप देगी । मैं नहीं उठने वाला। "
"तेरी तो !"
"बाबाजी का ठुल्लु , मैं नहीं उठने वाला!!!"
बच्चे के मुंह से यह सुनके लड़के की बोलती बंद हो गयी। सचमुच , उस बुद्धू बक्से को , जिसे हम इतना कोसते है , वो किसी की आवाज बन सकता है।